कृष्ण जन्माष्टमी 2025: तिथि, महत्व, व्रत और पूजा विधि

By Harikesh Maurya

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कृष्ण जन्माष्टमी 2025
कृष्ण जन्माष्टमी 2025
कृष्ण जन्माष्टमी 2025

कृष्ण जन्माष्टमी 2025 की तिथि, महत्व, व्रत और पूजा विधि की पूरी जानकारी जानें। शुभ मुहूर्त, कथा, परंपराएं और पूजा सामग्री के साथ मनाएं श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव।

कृष्ण जन्माष्टमी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

कृष्ण जन्माष्टमी, भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हर वर्ष भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। 2025 में कृष्ण जन्माष्टमी 15 अगस्त 2025, शुक्रवार को मनाई जाएगी।

  • निशिता काल पूजा मुहूर्त: रात 11:59 बजे से 12:45 बजे तक

  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 15 अगस्त 2025, सुबह 09:15 बजे

  • अष्टमी तिथि समाप्त: 16 अगस्त 2025, सुबह 10:05 बजे

  • रोहिणी नक्षत्र: 15 अगस्त को दिन भर और रात्रि में रहेगा

कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

कृष्ण जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष है। मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लेकर धरती से अधर्म का नाश किया और धर्म की स्थापना की।

  • यह दिन भक्ति, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देता है।

  • जन्माष्टमी के दिन व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

  • मथुरा और वृंदावन में इस दिन भव्य झांकियां, रासलीला और दही-हांडी का आयोजन किया जाता है।

कृष्ण जन्माष्टमी 2025
कृष्ण जन्माष्टमी 2025

जन्माष्टमी व्रत विधि

  1. सुबह स्नान और संकल्प: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।

  2. पूजा स्थल की तैयारी: घर में मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें, फूलों और आम के पत्तों से सजाएं।

  3. व्रत के नियम: पूरे दिन अन्न का त्याग करें, फलाहार या निर्जला व्रत रखें।

  4. भगवान श्रीकृष्ण की स्थापना: बाल गोपाल की प्रतिमा को झूले में विराजमान करें।

  5. पूजा सामग्री: तुलसी दल, माखन-मिश्री, पंचामृत, फूल, धूप-दीप, मोर पंख आदि।

  6. अष्टमी रात्रि पूजा: निशिता काल (मध्यरात्रि) में श्रीकृष्ण का जन्म उत्सव मनाएं, शंखनाद करें और आरती उतारें।

  7. भोग अर्पण: माखन, मिश्री, पंजीरी और पंचामृत का भोग लगाएं।

  और पढ़ें जन्माष्टमी कब है 2025 – तिथि, पूजा मुहूर्त, महत्व और व्रत कथा

कृष्ण जन्म की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, मथुरा के राजा कंस की बहन देवकी के आठवें पुत्र के रूप में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ। कंस को आकाशवाणी के माध्यम से बताया गया था कि देवकी का आठवां पुत्र उसका वध करेगा। इसलिए उसने देवकी और वसुदेव को कारागार में कैद कर दिया।
जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तब चमत्कारिक रूप से कारागार के ताले खुल गए और वसुदेव जी उन्हें यमुना पार गोकुल में नंद बाबा के घर ले गए। वहां यशोदा मैया ने उनका पालन-पोषण किया।

जन्माष्टमी पर विशेष परंपराएं

  • दही-हांडी: महाराष्ट्र में युवा ‘गोविंदा’ टीम बनाकर मटकी फोड़ प्रतियोगिता करते हैं।

  • रासलीला: वृंदावन और मथुरा में भगवान कृष्ण और राधा की रासलीला का मंचन किया जाता है।

  • झांकियां: मंदिरों और गलियों में कृष्ण लीला की झांकियां सजाई जाती हैं।

  • भजन-कीर्तन: भक्त पूरे दिन भजन-कीर्तन कर माहौल को भक्तिमय बनाते हैं।

स्वास्थ्य और आध्यात्मिक लाभ

जन्माष्टमी व्रत केवल धार्मिक नहीं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी लाभकारी है:

  • डिटॉक्सिफिकेशन: व्रत के दौरान शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।

  • मानसिक शांति: भक्ति और ध्यान से मन शांत रहता है।

  • सकारात्मक ऊर्जा: पूजा और मंत्रोच्चार से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है।

निष्कर्ष

कृष्ण जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और भक्ति का उत्सव है। यह हमें सत्य, धर्म और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। 2025 में जन्माष्टमी का पर्व पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन व्रत, पूजा और भक्ति में लीन होकर भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाएं और उनके आशीर्वाद से जीवन को मंगलमय बनाएं।

इन्हें भी पढ़ें: “जन्माष्टमी 2025: श्रीकृष्ण जन्म की पावन कथा, व्रत विधि, तिथि और पूजा मुहूर्त”

Harikesh Maurya

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