पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का निधन: जानिए उनका राजनीतिक सफर

By Harikesh Maurya

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सत्यपाल मलिक

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सत्यपाल मलिक का प्रारंभिक जीवन

भारतीय राजनीति में कई ऐसे नेता हुए हैं जिन्होंने अपनी स्पष्टवादिता और निर्भीक स्वभाव से विशेष पहचान बनाई। ऐसे ही नेता थे सत्यपाल मलिक, जिन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा के दौरान कई बार सत्ता से असहमति जताकर चर्चा बटोरी। आज हम इस लेख में सत्यपाल मलिक के जन्म से लेकर उनके निधन तक के जीवन के हर पहलू को विस्तार से जानेंगे।

जन्म: सत्यपाल मलिक का जन्म 24 जुलाई 1946 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक जाट परिवार में हुआ था। उनका बचपन ग्रामीण परिवेश में बीता, जहां उन्होंने सामाजिक न्याय और किसानों की समस्याओं को करीब से देखा।

शिक्षा: उन्होंने मेरठ कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली और फिर आलाहाबाद विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही वे राजनीति में सक्रिय हो गए थे।

राजनीतिक करियर की शुरुआत

सत्यपाल मलिक ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय क्रांति दल से की थी। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस, जनता दल, और अंततः भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा।

  • 1980 में वे पहली बार राज्यसभा के सदस्य बने।

  • 1989 में वे अलीगढ़ से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने।

  • वे केंद्र सरकार में संसदीय कार्य मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय में राज्य मंत्री भी रहे।

राज्यपाल के रूप में कार्यकाल

सत्यपाल मलिक को राजनीति में नई पहचान तब मिली जब उन्हें विभिन्न राज्यों का राज्यपाल नियुक्त किया गया:

  1. बिहार के राज्यपाल (2017–2018): उन्होंने अपने कार्यकाल में शिक्षा में सुधार और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा दिया।

  2. जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल (2018–2019): यह उनका सबसे चर्चित कार्यकाल था। अगस्त 2019 में, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के दौरान वे वहीं के राज्यपाल थे।

  3. गोवा के राज्यपाल (2019–2020)

  4. मेघालय के राज्यपाल (2020–2022)

राज्यपाल के तौर पर उन्होंने कई बार केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की, विशेष रूप से किसानों के मुद्दे पर।

किसानों के समर्थन में आवाज

सत्यपाल मलिक ने अपने राज्यपाल कार्यकाल के दौरान और रिटायरमेंट के बाद भी किसानों के मुद्दों पर खुलकर बोलना जारी रखा। वे कृषि कानूनों के विरोध में थे और उन्होंने इसे किसान विरोधी करार दिया था।

उनकी यह स्पष्टवादिता उन्हें कई बार राजनीतिक विवादों में भी ले गई, लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।

व्यक्तिगत जीवन

सत्यपाल मलिक एक साधारण और जमीन से जुड़े नेता रहे। उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो बच्चे और पोते-पोतियाँ हैं। वे जीवनभर किसानों, छात्रों और मजदूरों की आवाज बनते रहे।

सत्यपाल मलिक
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निधन की खबर

2025 के अगस्त महीने में सत्यपाल मलिक के निधन की खबर ने पूरे देश को शोक में डाल दिया। वे 79 वर्ष के थे। बताया गया कि वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे और दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विपक्षी नेताओं और किसानों ने गहरा दुख व्यक्त किया।

उनके निधन पर नेताओं की प्रतिक्रिया

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा – “सत्यपाल मलिक एक निर्भीक और न्यायप्रिय नेता थे। उनके योगदान को देश हमेशा याद रखेगा।”

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शोक जताया – “मलिक जी ने राष्ट्रसेवा में अपनी पूरी ज़िंदगी समर्पित कर दी।”

  • राहुल गांधी ने उन्हें किसानों की आवाज बताया और कहा कि – “वे सत्ता से टकराकर भी किसानों के साथ खड़े रहे।”

सत्यपाल मलिक की विरासत

सत्यपाल मलिक उन नेताओं में से थे जो कभी भी ‘हाँ में हाँ’ मिलाने वाले राजनेता नहीं बने। उन्होंने हमेशा सत्य और जनहित के लिए आवाज उठाई। चाहे वह जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 का मुद्दा हो, या किसान आंदोलन – उन्होंने कभी अपनी बात कहने में संकोच नहीं किया।

उनकी ईमानदारी, साहस और स्पष्ट विचारधारा उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना देती है।

निष्कर्ष

सत्यपाल मलिक का जीवन एक ऐसे नेता की कहानी है जो राजनीति को जनसेवा का माध्यम मानता था। उन्होंने सत्ता में रहकर भी सत्ता की आलोचना की, और जनता के लिए लड़ते रहे। उनका निधन न सिर्फ एक राजनेता की मृत्यु है, बल्कि एक विचार, एक साहसिक आवाज और एक निडर व्यक्तित्व की समाप्ति है।

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Harikesh Maurya

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